भारतीय रुपया डॉलरके मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तरपर पहुंचा, जिसके बाद RBI ने बाजारमें हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है।

वैश्विक आर्थिक दबाव, विदेशी निवेश निकासी और कच्चे तेल कीमतोंमें बढ़ोतरीसे रुपयापर भारी दबाव लगातार बढ़ रहा है अब।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रुपयाको स्थिर रखनेके लिए डॉलर बिक्री और मुद्रा बाजारमें सक्रिय हस्तक्षेप किया है लगातार।

विशेषज्ञोंके अनुसार कमजोर रुपयासे आयात लागत, ईंधन कीमतें और देशकी महंगाई दरपर सीधा असर पड़ सकता जल्द अब।

विदेशी निवेशकोंकी बिकवाली और वैश्विक बाजार अस्थिरताके कारण भारतीय शेयर बाजारमें भी दबाव देखनेको मिल रहा लगातार है।

अब निवेशकों और कारोबार जगतकी नजर RBI की अगली रणनीति तथा रुपयामें संभावित सुधारपर टिकी हुई है लगातार।