भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, जिसके बाद आरबीआई ने 2013 टेपर टैंट्रम जैसी रणनीति अपनाने पर विचार शुरू किया
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हुआ और विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजारों पर कम होता दिखा।
रिपोर्ट्स अनुसार आरबीआई ब्याज दर बढ़ाने, करेंसी स्वैप और विदेशी निवेश आकर्षित करने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर रहा लगातार।
2013 टेपर टैंट्रम संकट के दौरान भी आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाकर और विदेशी डॉलर फंड जुटाकर स्थिति संभाली थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कमजोर रुपया महंगाई बढ़ा सकता है और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
आरबीआई की नई रणनीति से रुपया स्थिर करने और निवेशकों का भरोसा वापस लाने की उम्मीद जताई जा रही फिलहाल अब।
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