मध्यपूर्व संकट के बीच सरकारी तेल कंपनियों को दस सप्ताह में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा नुकसान हुआ लगातार।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक कच्चे तेल दामों के कारण पेट्रोल-डीजल कीमत बढ़ना लगभग तय माना जा रहा।

इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल बाजार कीमतों से कम दरों पर ईंधन बेचकर भारी घाटा झेल रहे हैं अभी।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट के चलते वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे भारत समेत कई देशों पर दबाव बढ़ा लगातार।

सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने प्रयास कर रही, लेकिन तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव तेजीसे बढ़ता दिखाई दे रहा।

अगर वैश्विक तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो भारत में पेट्रोल और डीजल कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी संभव मानी जा रही।